महाकवि विद्यापतिक पुण्य स्मृति मे देसिल बयना (हैदराबाद)क विशेष साहित्यिक समारोह
रवि, दि० ८ नवम्बर २००९ कऽ मैथिली साहित्य मंच 'देसिल बयना'क तत्वावधान मे महाकवि विद्यापतिक पुण्य स्मृति मे एकटा विशेष साहित्यिक समारोह प्रो० डा० अमरनाथ मिश्र क अध्यक्षता मे आयोजित कयल गेल। समारोहक उदघाटन सम्माननीय साहित्यकार एवं दैनिक स्वतंत्र वार्ता क संपादक डा० राधेश्याम शुक्ल कयलन्हि।
'जय जय भैरवि...' केर गायन एवं पाँच वर्षीय बालक चि० हिमांशु द्बारा शिवस्तोत्रक पाठ सँ कार्यक्रम आरम्भ भेल। संस्थाक कार्यकारी अध्यक्ष किशोर कुमार ठाकुर अतिथिगणक स्वागत कयलन्हि। श्रीमती भारती चौधरी कवि कोकिलक सामान्य परिचय प्रस्तुत कयलन्हि।
संयोजक दयानाथ झाजी विद्यापतिक प्रासंगिकता प्रस्तुत करैत हुनक विभिन्न आयाम पर अपन विचार व्यक्त कयलन्हि। ओ बजलाह - आइ ६०० वर्षक उपरान्तहु विद्यापति एहि दुआरे प्रेरणाक श्रोत छथि जे संस्कृतक प्रकांड विद्वान् होइतहु अपन कविताक लेल ओ ओहि भाषा कें चुनलन्हि जे समाज मे जनसाधारण द्बारा बाजल जा रहल अछि।
श्रीमती डा० अहिल्या मिश्र "विद्यापति पदावली मे भक्ति श्रृंगार" पर विस्तृत विवेचना प्रस्तुत करैत बजलीह जे विद्यापति कें श्रृंगारक कवि नहि कहि जँ भक्तिक संग संग सौंदर्यक कवि कही तऽ से प्रायः अधिक उचित हएत। भक्ति एवं श्रृंगार (सौंदर्य) केर सन्दर्भ मे प्रचुर मात्रा मे हुनक पदावली सँ उद्धरण दऽ ओ अपन धारणा के स्थापित कयलन्हि।
डा० राधेश्याम शुक्ल अपन उदघाटन भाषणक क्रम मे बजलाह जे विद्यापतिक कविता मे भक्ति आ श्रृंगार एतेक घुलल अछि जकरा पृथक करब कथमपि सम्भव नहि। ओ कहलनि - भावना कें प्रकट करबा लेल जाहि शैली कें विद्यापति अपनौलन्हि ओ कियो आन कवि आइ धरि नहि कऽ सकलाह। मुख्य अतिथि केर रूप मे साहित्य सेवी एवं दैनिक हिन्दी मिलापक सम्पादक श्री रामजी सिंह 'उदयन' अपन भाषण मे डा० शुक्ल सँ सहमति दर्शौबैत कहलन्हि जे विद्यापतिक गीत मिथिलेतर बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, असम एवं उडीसा मे ओतबहि आदर सँ गाओल आ सराहल जाइत अछि जतबा ख़ास मिथिला मे। एकर कारण ई जे प्रेम के भक्तिक आधार मानि हर वयस एवं हर कोटिक लोकक लेल रुचिकर रचना ओ ओहि भाषा मे कयलन्हि जे जन जन द्बारा बाजल जाइत अछि अर्थात देसिल बयना मे। मैथिली मे।
अध्यक्ष डा० अमरनाथ मिश्र सबहक विचारक सार तत्त्व निकालैत कहलैन्ह जे विद्यापति एक महान कवि छलाह। ओ युग पुरुष छलाह। कवि कोकिल विद्यापति जनमानस के एहेन कऽ आलोड़ित कयलन्हि जे विश्व साहित्य हुनकर ऋणी अछि।
महासचिव श्री दिवाकर झा धन्यवाद ज्ञापन कयलन्हि।
समारोहक दोसर सत्र वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झाक अध्यक्षता मे संपन्न भेल जाहि मे कथावाचन एवं कविता पाठ कैल गेल। श्रीमती मैथिली ठाकुर (बुधनी), श्रीमती साधना शंकर (अनमोल वस्तु जे हेरा गेल) एवं श्री मुनीन्द्र मिश्र (बैंकक कर्ज सँ लेल घर) स्वरचित कथाक वाचन कयलन्हि।
काव्य पाठ मे भाग लेबऽ बला कवि छलाह - मनोज, संजय कुमार ठाकुर, श्रीमती साधना शंकर, ज्योति प्रकाश लाल, धीरेन्द्र कुमार झा 'धीरू', बी० के० कर्णा, चन्द्रमोहन कर्ण, गोवर्धन ठाकुर, सतीश चंद्र झा, मुनीन्द्र मिश्र, डा० अमरनाथ मिश्र एवं बुद्धिनाथ झा।
आद्योपांत मंच संचालनक क्रम मे आदरणीय बुद्धिनाथ झा प्रत्येक वक्ता एवं कवि के पृथक पृथक रूपें अपन आशु कविताक चारि चारि टा पांति द्बारा मंच पर आमंत्रित करैत एकटा अपूर्व मिठास सँ वातावरण के ओत प्रोत कऽ देलन्हि। हुनक एहि अनुपम देन कें संपूर्ण हैदराबादक साहित्य संसार प्रायः कहियो बिसरि नहि सकत।
श्रीमती गीता देवी, साधना शंकर, सुधा झा क गायन एवं हिनका लोकनिक समेत महिला वृन्द द्बारा प्रस्तुत समदाउन सँ समारोहक अन्त भेल।