Thursday, September 25, 2014

ठनका

माय गै
काल्हि राति
खसल हमर देह पर
मारिते रास
ठनका
कतेक रास से
किजानि गेलियई

अन्हार गुज्ज
भयावह राति
बड्ड विकराल
माय गै
केहेन रहैक क्षुधा
छौंरा सभक
से नहिं जानि
दैत्य सब
चिबा गेल हमरा
सौंसे

माय गै
डूबैत रहलहुं
राति भरि
पीड़ाक समुद्र में
चिचियाइत/डिड़ीयाईत
दयाक याचना
नेहोरा-बिनती
आ, तकर बाद
माय गै
सब किछु सुन्न
निस्तब्ध/निःशब्द

माय गै
कहाँ एलाह कृष्ण
बस-
चारु दीसि दु:शासन
आ-
कौरवक अट्टाहास
सियाह अकासक त'र
नोचाइत रहल
हमर मान
हमर मोन
हमर देह
हमर प्राण
माय गै
मिझाइत रहल
हमर ज्योति
मिटाइत रहल
हमर सर्वस्व

माय गै
उड़ैत प्राण
आ, असंख्य वज्राघातक मध्य
देखलियै
ओकरो सबहक गट्टा पर बान्हल
सुन्नर/चमकैत राखी
माय गै
सुन्नर राखी सब
चमकैत रहल
आ, हमर देह पर
राति भरि ठनका
खसैत रहल...