Friday, January 27, 2012

अप्पन अप्पन बात



कोटि कोटि के गबन घोटाला
सबहक ध्यान बटौने अइ
सय-हजार में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

अइ दफ्तर सँ ओइ दफ्तर धरि
एड़ी रगड़ब जारी अइ
दफ्तर सब में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

भ्रष्टक सेना चहुँदिस पसरल
झीक रहल जीवन पर्यन्त
लेन - देन में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

कारी टाका, बाट हवाला 
सीमा पार नुकौने अइ
जेबी झँपने हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

हाकिम निर्बल, लचर व्यवस्था
आँखि - कान नित मुनने अइ
मूड़ी गोंतने हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

कोटि कोटि के गबन घोटाला
सबहक ध्यान बटौने अइ
सय-हजार में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू ...




मनोज
सिकंदराबाद
२७/०१/२०१२

हे मनमोहन!



बड़ी टा कुर्सी
राजधानीक कुर्सी
राजगद्दी
एहि महाकुर्सी पर
स्थापित -
एकटा अद्भुत पगड़ी
पगड़ीक तऽर में मुदा
भयावह मौन.....

महाभारत -
कृष्ण-हीन
कुरुक्षेत्र सँ -
अर्जुन विलीन
दुर्योधनक आंगुर में नचैत -

सुदर्शन
गाण्डीव तनने
दुःशासन
चहुँदिस...
हकमैत द्रौपदीक
 
दैनिक चीर हरण पर
थोपड़ी पारैत
धृतराष्ट्रक सन्तति

देख रहल अछि सब
वैह अद्भुत पगड़ी
पगड़ीक तऽर में मुदा
भयावह मौन...

सह सह करैत
नरभक्षीक भीड़
नोचि रहल माउँस
पीबि रहल शोणित
मदमस्त भऽ
लूटि रहल सर्वस्व..
छटपटाइत मनुक्ख
हाहाकार करैत
करेज फाड़ि चिकरैत
लोकतान्त्रिक मृगतृष्णाक मध्य
तकैत अपन अस्तित्व
हाथ पथने
मंगैत सांस लेबाक भीख

देख रहल अछि सब
वैह अद्भुत पगड़ी
पगड़ीक तऽर में मुदा
भयावह मौन...

राजधानीक कुर्सी
बहुमूल्य कुर्सी
लोकक आँत सँ बनल
लोकतांत्रिक कुर्सी
एहि महाकुर्सी पर
सुशोभित -
एकटा अद्भुत पगड़ी
पगड़ीक तऽर में मुदा
भयावह मौन.....

मनोज
सिकंदराबाद
२६/०१/२०१२