Monday, November 24, 2014

सुनामी

बड्ड प्रेम सँ
ओकर दूनू हाथ कें
हाथ में लेने
केहन मिश्री सन मधुर
बाजल रहै छौंड़ा
"ऐं गई
ई तोहर आँखि छउ
आ कि समुद्र?"
मुदा उतरल पार नहिं लगलहि
छौंड़ा के
ओहि समुद्र मे
चलि गेल रहैक
उठि कS
किएकि
नहिं भेटल रहैक
छौंड़ा के
ओकर घर मे
कोनो बजार
ओकर बाप मे
नहिं भेटल रहैक
कोनो गहिकी
तएँ उठि कS
बेदी पर सँ
चलि गेल रहैक छौंड़ा
छोड़ि कS
नोरायल, पियासल समुद्र...

आ तखन आयल रहैक
ओहि महासमुद्र मे
भयंकर / विकराल
एकटा सुनामी
जे कS देलकइ विध्वस्त
बहुत किछु...
थरथराय लागल रहैक
ओकर देह
ह्रदयक स्पंदन
परिवर्तित भS गेलैक
कतहु बड्ड गहींर मे
ओकर सर्वस्व केँ झकझोरैत
प्रबल भूमिकंप मे
जकर कोलाहल सँ
आंदोलित भेल रहैक
फनफनाइत महासमुद्र...

फाटल रहैक
कईएक रास ज्वालामुखी
ओकर पोर पोर सँ
जकर लावा सँ
लाल भS गेल रहैक
दहकैत महासागर

आगिक धधरा ओढ़ने
छाउर भS गेल रहय ओ
आ सुनामीक
महाकाय लहरि
घीच कS लS गेल रहैक
छाउर केँ
फेर सँ समुद्र मे
आ धS देने रहैक
ओरिया कS
कतहु गहींर
बड्ड गहींर मे...


मनोज
हैदराबाद
२४/११/२०१५

Saturday, November 15, 2014

हास परिहास

सिकुड़ल देह
सड़कक कात मे
गन्हाइत फुटपाथ पर
कचराक बोरी सन
ओहिना फेकायल
सड़इत देह

फेर राति गेल
फेर भोर भेल
सब देखि सूनि
बतहा मरि गेल...

देखने रहइ ओ
अन्हरिया राति मे
प्रशासकीय कार्यालय मे होइत
किछु आदान
किछु प्रदान
हरियर नोटक आदान
आ, उज्जर कागत पर
हस्ताक्षरित पर्मिटक प्रदान

सुनने रहई ओ
बिकट अट्टहास
हास परिहास
"जाउ भ' गेल
निश्चिन्त रहू बाउ
भरि मोन खाउ
भरि मोन खोआउ"

बुझने रहइ ओ
फेर बनतइ
कतेको रास खोंता
फेर ढहतइ
कतेको रास खोंता
फेर खंडित मनुक्ख
फेर सोनितायल माटि
मुइलक हिसाब किताब
कागती सवाल जवाब
फेर किछु आदान
फेर किछु प्रदान
एक ढेर लहास
फेर हास परिहास
बिकट अट्टहास...

कहने रहइ वैह
बड्ड भेल
आब नहिं
जे किछु देखल
जे किछु सूनल
आब होयत
अन्हार में प्रकाश
निश्चित पर्दाफाश
आ फेर..
आँखि बन्न
देह सुन्न
आर पार
सोनितक धार
फेर किछु आदान
फेर किछु प्रदान
खंडित विश्वास
हास परिहास
बिकट अट्टहास..

फेर राति गेल
फेर भोर भेल
सब देखि सूनि
बतहा मरि गेल...