अघा गेलहुँ युग-युगक राति सँ
उठू भेँट हो नवल प्रात सँ
किए औंघायल मोन अपन अछि
किए सेरायल रक्त अपन अछि
चलू क्रांति के चूल्हि पजारब
भरि मिथिला के द्वार-द्वार सँ
उठू भेँट हो...
बहुत भेल, नहि आब याचना
हाथ जोड़ि नहि कोनो प्रार्थना
बड़ मंगलहुँ आब नहि मांगब
मिथिला पायब अधिकार सँ
उठू भेँट हो...
कतोक बर्ख माँ मिथिला कनली
हमरे सबहक आस मे रहली
मायक दूधक लाज बचायब
मायक नोरक प्रतिकार सँ
उठू भेँट हो...
अपन राज्य तँ शासन अपनहि
हएत सकल सपना सच तखनहि
अपन विकासक बाट बनायब
मिथिला राज्यक समाचार सँ
उठू भेँट हो...
अघा गेलहुँ युग-युगक राति सँ
उठू भेँट हो नवल प्रात सँ