ओ
दुनू बड़द सँ
गप्प करइए
गीत गबइए
धरती केँ
नबका हरियर नूआ
पहिराबय लेल
तैय्यार करइए
एकाग्र-चित्त
खेत जोतइए
ओ
माटि पर
हमर हस्तरेखा गढ़इए
हमर अन्नदाता
तैय्यार करइए
हमर जीवित रहबाक
सबसँ पैघ अवलंब
उदराग्निक हविष्यान्न
देहक झहरैत घाम सँ
सिक्त करइए माटि के
माटिक पूत
आनंद मग्न
सृजनकर्म मे व्यस्त
केहन तहन रौदी
केहन तहन धाह
धुह!
ओ की डरत ताप सँ
जे जीबइए
सीना ठोकि क'
सुरुजक छाहरि मे...