Saturday, March 7, 2015

आनन्दमयी


भट्ठी पर
कौखन माटि सनैए
कौखन ढाकीक-ढाकी
काँच-पाकल पजेबा
उघैत फिरैए
ई वीरांगना!

स्वाभिमान सँ भीजल
एकर प्रखर रूप-रंग
देखियौ ने केहन ओज छैक
केहन तेज छैक चमकैत मुँहेठ पर
एम्हर सँ ओम्हर
ओम्हर सँ एम्हर
जेना सौर्य-ऊर्जा सँ अविराम चलैत होइ
एकर देह सन प्राणयुक्त मसीन..

पजेबा के ई सुन्नर रंग-रूप
ई खन-खन / ई टन-टन
भेटल छैक एकरे घाम सँ
जाहि सँ सना क'
सुन्नर लाल पाथर भेल माटि
बिहुँसि रहल अछि
अनमन ओहिना
जेना बिहुँसैत अछि नवजात शिशु
अपन आनन्दमयी माय के देखि
अपन सौभाग्य के पाबि...

हैदराबाद
०७/०३/२०१५

Wednesday, March 4, 2015

विरहिन

सखी हे
फागुन दूसय मोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

एक राधिके स्नेह-सिक्त छथि
केहन निठुर चितचोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

हृदय काटि क' अर्पित कएलहुँ
आँखि बहय नित नोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

हम विरहिन छिछियैल फिरै छी
दुःखक ओर ने छोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

भरि संसार इजोत पसारथि
हमर हुअय नहि भोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

सभतरि सब रस-रंग मे भीजल
हमर सुखायल ठोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

सखी हे
फागुन दूसय मोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर...

हैदराबाद
०४/०३/२०१५

Monday, March 2, 2015

छाउर

बंगालक खाड़ी दिस
कल-कल बहैत ओहिना
सौम्य हुगलीक चंचल लहरि
थिरकैत नदीक दुनू कात
ओहिना ठाढ़
ईंट-पाथरक बोन
हावड़ा पुलक सीना पर दौगैत
ओहिना कारिख पोतैत
वाहनक हेंज
हवाकेँ पुरस्कृत करैत
कने आर कार्बन मोनोक्साइड सँ
ओहिना..

सब दृश्य अनमन वैह
परिवर्तन मात्र एक
नहि अछि आइ हमर दहिना हाथ मे
अहाँक बामा हाथ

वज्र पाथर सन स्थिर
एहि परिस्थिति मे की गेलै बदलि
जे बदलि गेलहुँ अहाँ क्षण भरि मे
भसैत दुर्गाक प्रतिमा सन
कहू ने
कोना भेल हृदय पाषाण
प्रयास क' रहल छी हम बुझबाक
सत्ते कहै छी..

देखू ने
कहाँ बदलल
हमर सोनित संग बहैत
अहाँक सांसक मृदु ताप
हमर गत्र-गत्र मे गोदायल
अहाँक नामक स्थायी रंग
कान मे मधु सन बहैत
अहाँक स्वरक संगीत
संग जीबा-मरबाक
कतेको रास गीत
कहाँ बदलल किछु..

परिवर्तन मात्र एक
अहाँ भ' गेलहुँ क्षण भरि मे
जात्राक नायिका सन
क्यो आन
आ बदलि देलहुँ हमर अस्तित्वकेँ
हठात्!

एकटा जीबैत मनुक्ख
चलैत फिरैत
गीत गबैत मनुक्ख
बनि गेल आब
अहींक हृदय सन पाथर
प्रतिक्षण जरैए
मुदा निमतल्ला घाट पर डहाइत लहास सन
छाउर होयबाक सौभाग्य कहाँ...

हैदराबाद
०२/०३/२०१५

Sunday, March 1, 2015

प्रश्नकाल


कानय मेघ आ काँपय वसुधा
ई केहन व्यवहार कहू
विरह भाव ककरहु, क्यो डूबय
ई केहन अतिचार कहू

आफत मे छै प्राण चिड़ै केर
नोर बहै झर-झर सदिखन
पाँखि काटि क' कहै जे उड़ि जो
ई केहन सत्कार कहू

सात जन्मकेँ प्रण केने छल
बरखो भरि ने संग रहल
मटिया तेल कहै जे जरि जो
ई केहन चित्कार कहू

बेंतक मारि सहैए छौंड़ा
खाता-पिलसिन सब निंङ्घटल
थेत्थर मोन कहै जे अड़ि जो
ई केहन अधिकार कहू

युग-युग सँ अछि दैत परीक्षा
युग-युग सँ पपनी भीजल
धरती फाटि कहै जे गड़ि जो
ई केहन संसार कहू

सोनित घीचि हाट पर बेचय
ई केहन बाजार कहू
अपने सँ अपनहि घर डाहय
ई केहन प्रतिकार कहू...

हैदराबाद
०१/०३/२०१५