Friday, January 27, 2012

अप्पन अप्पन बात



कोटि कोटि के गबन घोटाला
सबहक ध्यान बटौने अइ
सय-हजार में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

अइ दफ्तर सँ ओइ दफ्तर धरि
एड़ी रगड़ब जारी अइ
दफ्तर सब में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

भ्रष्टक सेना चहुँदिस पसरल
झीक रहल जीवन पर्यन्त
लेन - देन में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

कारी टाका, बाट हवाला 
सीमा पार नुकौने अइ
जेबी झँपने हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

हाकिम निर्बल, लचर व्यवस्था
आँखि - कान नित मुनने अइ
मूड़ी गोंतने हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू

कोटि कोटि के गबन घोटाला
सबहक ध्यान बटौने अइ
सय-हजार में हमहूँ सब छी
अप्पन अप्पन बात करू ...




मनोज
सिकंदराबाद
२७/०१/२०१२

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