Wednesday, July 28, 2010

निराशाक बन्न घर

बन्न घर में ओ
एकसरे बैसल
डरैल/घबरैल
कोनो उत्साह नईं
कोनो उम्मीद नईं..

कईएक बेर कहलियई
कतेक बुझेलियई
तोड़ि दे केबाड़
उखाड़ि दे खिड़की
बाहर निकल भाई
तोहर एहि संसार सँ बाहर
आरो छै संसार
इजोत छै, सुगंध छै
मनुक्ख में प्राण छै..

नईं सुनैत अछि ओ
ओहिना बैसल निःशब्द
निष्प्राण/निस्तेज
डरैल/घबरैल
मुदा, हमरा अछि विश्वास
टुटतई केबाड़/खिड़की
ढहतई निराशाक बन्न घर
बाहर निकलत ओ
हँसत, गीत गाओत
हमरा अछि विश्वास
एखनहुं किछु नीक छै
एखनहुं किछु ठीक छै...

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