Wednesday, December 31, 2014

प्रजातंत्र

जनतंत्रक मुख्य अखाड़ा मे
अधिकार-शक्ति केर प्रांगण मे
आङ्गुर पर चेन्ह लगैत रहल
कयो धोआ गेला क्यो पोछा गेला

सभ बाट-घाट चौराहा पर
भीतर-बाहर घर आँगन मे
बुधियारिक ढेका फुजैत रहल
क्यो नुका गेला क्यो देखा गेला

जनाधिकार केर महाकुम्भ
नित लोहछल लोकक मेला मे
शोषण केर खुट्टा खसैत रहल
क्यो धरा गेला क्यो पड़ा गेला

निर्णय-स्थल जनमानस केर
पाखंडक डीह-घराड़ी मे
भोटरक बुलडोज़र चलैत रहल
कयो लेढ़ा गेला क्यो धंगा गेला

लगचियैल दुर्जन विनाश
चहुँदिस सब गाम-नगरिया मे
थेथरइ केर कोठा ढहैत रहल
क्यो नुका गेला क्यो बिला गेला

संविधान केर प्रबल तेज
धधकल-पजरल जनमानस मे
गणतंत्रक अन्हर बहैत रहल
कयो बहा गेला क्यो दहा गेला

कयो फेका गेला क्यो फेंटा गेला
क्यो सुखा गेला क्यो टटा गेला..

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