Monday, March 2, 2015

छाउर

बंगालक खाड़ी दिस
कल-कल बहैत ओहिना
सौम्य हुगलीक चंचल लहरि
थिरकैत नदीक दुनू कात
ओहिना ठाढ़
ईंट-पाथरक बोन
हावड़ा पुलक सीना पर दौगैत
ओहिना कारिख पोतैत
वाहनक हेंज
हवाकेँ पुरस्कृत करैत
कने आर कार्बन मोनोक्साइड सँ
ओहिना..

सब दृश्य अनमन वैह
परिवर्तन मात्र एक
नहि अछि आइ हमर दहिना हाथ मे
अहाँक बामा हाथ

वज्र पाथर सन स्थिर
एहि परिस्थिति मे की गेलै बदलि
जे बदलि गेलहुँ अहाँ क्षण भरि मे
भसैत दुर्गाक प्रतिमा सन
कहू ने
कोना भेल हृदय पाषाण
प्रयास क' रहल छी हम बुझबाक
सत्ते कहै छी..

देखू ने
कहाँ बदलल
हमर सोनित संग बहैत
अहाँक सांसक मृदु ताप
हमर गत्र-गत्र मे गोदायल
अहाँक नामक स्थायी रंग
कान मे मधु सन बहैत
अहाँक स्वरक संगीत
संग जीबा-मरबाक
कतेको रास गीत
कहाँ बदलल किछु..

परिवर्तन मात्र एक
अहाँ भ' गेलहुँ क्षण भरि मे
जात्राक नायिका सन
क्यो आन
आ बदलि देलहुँ हमर अस्तित्वकेँ
हठात्!

एकटा जीबैत मनुक्ख
चलैत फिरैत
गीत गबैत मनुक्ख
बनि गेल आब
अहींक हृदय सन पाथर
प्रतिक्षण जरैए
मुदा निमतल्ला घाट पर डहाइत लहास सन
छाउर होयबाक सौभाग्य कहाँ...

हैदराबाद
०२/०३/२०१५

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