Wednesday, March 4, 2015

विरहिन

सखी हे
फागुन दूसय मोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

एक राधिके स्नेह-सिक्त छथि
केहन निठुर चितचोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

हृदय काटि क' अर्पित कएलहुँ
आँखि बहय नित नोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

हम विरहिन छिछियैल फिरै छी
दुःखक ओर ने छोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

भरि संसार इजोत पसारथि
हमर हुअय नहि भोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

सभतरि सब रस-रंग मे भीजल
हमर सुखायल ठोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर..

सखी हे
फागुन दूसय मोर
सखी हे
रंग ने लागय मोर...

हैदराबाद
०४/०३/२०१५

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