साहित्य पथ पर अनवरत यात्रा.....
चलू साधू निसान खेलू खेल..
हमर खोखड़ल हृदयक दरकल आवरण तीरि लिय' आ देखि लिय' अपनहि आँखि सँ किछु अद्भुत भग्नावशेष
देखू आ करू तय की अछि बेसी जीर्ण हमर खोंटल हृदय आ की ओकर विदीर्ण आवरण!
आउ लगाउ दाओ खेलू खेल...
हैदराबाद १३/०२/२०१५
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