Saturday, February 28, 2015

उलहन


धुर केहन बड़द सन मनसा
हमरा देलैं ताकि गे
नहि बाजै छै अप्पन भासा
जीह गेल छै पाकि गे..

ढउआ कैंचा हम की करबै
हमरा लेल बलाय गे
भरि पिरथी पर कयो नहि भेटलौ
माटिक पूत जमाय गे..

जे नहि पुजतै माय के अप्पन
हैत ने हम्मर साँय गे
माँ मैथिलीक सुच्चा पूतक
संग बान्हि दे माय गे

हैदराबाद
२३/०२/२०१५

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