धुर केहन बड़द सन मनसा
हमरा देलैं ताकि गे
नहि बाजै छै अप्पन भासा
जीह गेल छै पाकि गे..
ढउआ कैंचा हम की करबै
हमरा लेल बलाय गे
भरि पिरथी पर कयो नहि भेटलौ
माटिक पूत जमाय गे..
जे नहि पुजतै माय के अप्पन
हैत ने हम्मर साँय गे
माँ मैथिलीक सुच्चा पूतक
संग बान्हि दे माय गे
हैदराबाद
२३/०२/२०१५
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