कोना हँसतै हमर भाखा जँ घर मे मान नहि भेटतै
कोना जीतै हमर बोली जँ तन मे प्राण नहि रहतै
बहै छै सभ दिशा देखू ने सगरो रक्त मायक अछि
कोना बचतै एकर जिनगी जँ पूतक ध्यान नहि रहतै
उधेसल केश, सतबै दर्द सउँसे देह नस-नस मे
कोना कटतै अन्हरिया आ दिया बाती कोना बरतै
रहय आँचर जकर झँपने सदति संततिकेँ दुर्गति सँ
तकर तीरल करेजाकेँ कहू ने लाज के रखतै
पजारल चूल्हि अछि पझबैत माटिक पूत-धी सभतरि
कोना सधतै ई माटिक ऋण आ मायक नोर के पोछतै
कोना हँसतै हमर भाखा जँ घर मे मान नहि भेटतै
कोना जीतै हमर बोली जँ तन मे प्राण नहि रहतै
हैदराबाद
२३/०२/२०१५
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