हाथ पकड़ने माथ, कहू ई केहन शहर छै!
सगरो झंझावात, कहू ई केहन शहर छै!
जगमग राति दिवस अन्हारमय
समय लगओने घात, कहू ई केहन शहर छै!
आस-भरोसक चिता जरै छै
टटा रहल छै आँत, कहू ई केहन शहर छै!
सिहरि क' मरि गेल जाड़ प्रकोपे
सड़क फेकायल कात, कहू ई केहन शहर छै!
मनुखे मनुखक माउँस तीरैये
मानवता भेल मात, कहू ई केहन शहर छै!
शून्य चेतना, शून्य वेदना
संत्रासक आघात, कहू ई केहन शहर छै!
नुका रहल छै बात, कहू ई केहन शहर छै!
छेका रहल छै हाथ, कहू ई केहन शहर छै!
हैदराबाद
११/०२/२०१५
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