Wednesday, February 11, 2015

संत्रास


हाथ पकड़ने माथ, कहू ई केहन शहर छै!
सगरो झंझावात, कहू ई केहन शहर छै!

जगमग राति दिवस अन्हारमय
समय लगओने घात, कहू ई केहन शहर छै!

आस-भरोसक चिता जरै छै
टटा रहल छै आँत, कहू ई केहन शहर छै!

सिहरि क' मरि गेल जाड़ प्रकोपे
सड़क फेकायल कात, कहू ई केहन शहर छै!

मनुखे मनुखक माउँस तीरैये
मानवता भेल मात, कहू ई केहन शहर छै!

शून्य चेतना, शून्य वेदना
संत्रासक आघात, कहू ई केहन शहर छै!

नुका रहल छै बात, कहू ई केहन शहर छै!
छेका रहल छै हाथ, कहू ई केहन शहर छै!

हैदराबाद
११/०२/२०१५

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