हमर जन्म आ मृत्यु
दुनू भेल
मायक कोखि मे
जैह अनलक
सैह ल' गेल..
जाइ छी
पुछबनि विधाता सँ
किए पठेलहुँ
ऐना अनेरे
देखू ने
माय सँ
भ' गेल छल स्नेह..
ताबत अहाँ सब
हमर एक काज
क' देब?
सुनने छी
निष्कलंकित करैत छथिन
माँ गंगा
त' एक लोटा गंगाजल
ढारि देबनि हुनका पर
जे हमर रक्त मे
विसर्जित केलनि
अपन पितृभावकेँ?
हमर सुखायल कण्ठ
कने भीज जाएत
मरियो क'
कने जीबि लेब
कहू ने
हमर ई काज
क्यो क' देब?
हैदराबाद
२२/०२/२०१५
No comments:
Post a Comment