धुर जी!
किए अनेरे
अपस्याँत छी भेल
जे ताकि रहल छी
से नहि भेटत
जतय तकै छी
सुनू कहैछी
बड़का रहस्य
जिनगीक गूढ़तम दर्शन
बहुधा
पाओल जाइछ
सुबकैत -
रद्दी बेचनिहारक
आगाँ मे,आ
बिहुँसैत -
टेम्पु-ट्रकक
पाछाँ मे
की?
बुझलियै किने?
हैदराबाद
०८/०२/२०१५
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