Sunday, February 8, 2015

स्वप्नलोक


साँचक माथा पाग रहै तँ कहबे की!
सुग्गा अपनहि बात कहै तँ कहबे की!

फूसिक चीनी मीठ लगै छै हाकिम के
सत्य गुड़ीचक मधुर लगै तँ कहबे की!

मुइला पर मे भोज हेतै रसगुल्ला के
जिबितो मे किछु मान भेटै तँ कहबे की!

भङठल प्रेमक मोन परै छै छौंड़ा के
बुढ़िया मायहु मोन परै तँ कहबे की!

मान किसानक बिका रहल चौबट्टा पर
धान किसानक बिका सकै तँ कहबे की!

धर्मक ठेकेदारी छै जकरा सभ के
मोनहु मे भगमान रहै तँ कहबे की!

साँचक माथा पाग रहै तँ कहबे की!
सुग्गा अपनहि बात कहै तँ कहबे की!

हैदराबाद
०६/०२/२०१५

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