मोसि मे
मिला देल गेल
मारिते रास संदेह
अवरुद्ध भेल
सहज प्रवाह सहजहि..
शब्द सभ कोंकिआइत
अटकल रहल
कलमक कण्ठ मे
हाक्रोस करैत
काल कोठरी मे बन्न
दम तोड़ैत..
मौन अछि लेखनी
कागत अछि स्तब्ध
बैधव्यक रंगहीनता ओढ़ने..
माछी भनभनाइत
रचनात्मकताक लहास पर
गाछ पर लुधकल
निसान सधने गिद्धक हेंज..
भोज हेतै आइ फेर
साहित्यक डीह पर...
हैदराबाद
२५/०२/२०१५
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