Monday, February 9, 2015

बिसबिस्सी


नेनपनक  किछु स्मृति
कहाँ बिसराइत छैक
रहिए जाइत छैक, आ
बड्ड बिसबिसाइत छैक..

जेठक दुपहरी मे
खेत जोतैत छल
केहन सान सँ हरबाह
स्वेद-स्नान क' भीजल
दिव्य लगै छल
मुदा एक्कहु बुन्न पानि
कहाँ देलक मुँह मे
रोजा छलै ने!

क्षितिज पर डूबैत
सिनुरिया सूर्यक संग
उठलै अजान
बिदा भेल बड़द हंकैत वीर
आ पछोर धेलहुँ हम
हरबाहक आँगन दिस
रोजा फुजितैक ने!

खूब खेलक हरबाह
आम-चूड़ा गूड़ि-गूड़ि
हमहूँ खेलहुँ खूब
गमगमाइत मालदह आम
भरि पोख खा
बिदा भेलहुँ गाम
पछोर देलक हरबाह
बड़द हंकैत..

हमरा सँ पहिनहि
पहुँच गेल छल दलान पर
हरबाहक मालदह आमक गमक..

ओकर गत्र-गत्र पर पड़लै
बेंतक असंख्य निसान
आ हमर हिस्सा आएल
बामा गाल पर
लाल बाबाक पाँच आङुरक छाप..

हमर गाल परका, आ
ओकर देह परका
मिटा गेल सब निसान समयानुसार
मुदा करेज पर पड़ल निसान
रहिए गेल अक्षुण्ण
अछि औखन बिसबिसाइत
ओकरो रहिये गेल हेतै..

चल गेल हरबाह
चल गेला लाल बाबा
मुदा ओइ दिनका निसानक पाठ
रहि गेल मोन
सिखा देलक बहुत किछु
आर जे होइ
धरि नहि हएब बाबा सन काठ
मनुक्ख मे देखब
हँसैत बजैत
सांस लैत
अगबे जीबैत मनुक्ख..

बस एतबे कामना
आर जे भ' जाय
धरि एहि करेजक
बिसबिस्सी टा नहि जाय...

हैदराबाद
०९/०२/२०१५

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