थम्हू
फराके रहू
डेग नहि बढ़ाउ
ल'ग नहि आउ..
ई हम नहि छी
जकरा अहाँ
नोचि-खसोटि
रक्त बहायब
मदान्ध भ'
नाचब/गीत गायब..
ई अछि हमर
ठुट्ठ लहास
त्यागि देल
पुरना आवास
किछु क' लेब
नहि बहत आब रक्त
नहि देत आब कोनो
निर्मम आनन्द..
आइ बहुत दिन पर
अन्ततः
हमर ई देह
नहा क' पबित्र अछि भेल..
तैं सुनू
फराके रहू
डेग नहि बढ़ाउ
ल'ग नहि आउ...
हैदराबाद
१९/०२/२०१५
No comments:
Post a Comment