Thursday, February 19, 2015

सद्यः स्नाता

थम्हू
फराके रहू
डेग नहि बढ़ाउ
ल'ग नहि आउ..

ई हम नहि छी
जकरा अहाँ
नोचि-खसोटि
रक्त बहायब
मदान्ध भ'
नाचब/गीत गायब..

ई अछि हमर
ठुट्ठ लहास
त्यागि देल
पुरना आवास
किछु क' लेब
नहि बहत आब रक्त
नहि देत आब कोनो
निर्मम आनन्द..

आइ बहुत दिन पर
अन्ततः
हमर ई देह
नहा क' पबित्र अछि भेल..

तैं सुनू
फराके रहू
डेग नहि बढ़ाउ
ल'ग नहि आउ...

हैदराबाद
१९/०२/२०१५

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