Monday, February 9, 2015

अलकतरा


शहरक ई सड़क
अलकतरा सँ नीपल
सोखि रहल
तमसायल सूर्यक अग्निकिरण
तपि रहल अछि
गलि रहल
चिपचिप अलकतरा

हम दौग' चाहैत छी
मुदा सटि जाइत अछि चट्टी
घमैत अलकतरा मे
खसि पड़ैत छी हम
मुँहे भरे
निपा जाइत छी हमहूँ
अलकतरा सँ
पोता जाइत अछि कारी अन्हार
सगरो

आन्हर शहरी दौड़
ई कारिख पोतने शहर
अहिना दौगबैत रहत
अहिना खसबैत रहत
अहिना हमर मुँह पर
कारिख पोतैत रहत

कतबो घाम, आ की
कतबो झहरैत नोर
धो सकत कहियो
मुँह पर लागल
ई शहरक पोतल अलकतरा?

हैदराबाद
०९/०२/२०१५

No comments:

Post a Comment