Friday, January 2, 2015

मूल्यांकन


कोना कहलहुँ
हम छी व्यर्थ?
मूल्यहीन छी हम
कोना कहलहुँ?
उँह!
अहाँ की बुझबइ!!

हउए देखियौ
ओ छथि हमर सरकार
सरकारक गद्दी
मुलायम / उज्जर धप-धप
आ ताहि गद्दी पर
गदगद् हमर सरकार
देखियौन हुनका
ओ बुझैत छैथ हमर मोल
अहाँ की बुझबइ!

उघैत छी जे हम
बालु/सीमेंट/रोड़ा-पाथरक
हृष्ट-पुष्ट बोरा
ताहि सँ देखियौ
चमकि रहल अछि हमर पीठ
फोंकाक सामूहिक प्रकाश सँ
ओहिना जेना
अन्हरिया राति मे
कारी सियाही सँ नीपल
अनंत अकास के
चमका दैत छैक
छिड़ियायल तरेगनक गुच्छ..
मुदा अहाँ की देखबइ
देखइ छथि हमर सरकार
आनंदित होइत छथि
अन्हार गुज्ज राति मे
चमकैत तरेगन देखि
गीत गबैत छथि
ओ बुझैत छथि हमर मोल
अहाँ की बुझबइ!

बुझैत छथि सरकार
हमर देह सँ झहरैत
घाम-रक्तक एक एक ठोप केर
घसाइत-कुटाइट
हाड़-माउंसक एक एक कण केर
मूल्य बुझैत छथि सरकार
आ अइ सबहक उचित दाम बूझि
लाभ सहित बेचि
बनबइ छथि
अपन विशाल महल/दुर्ग/साम्राज्य

अहाँ की बुझबइ!
जाउ पूछियौन हुनका
कतेक मूल्यवान अछि
हमर जरैत देह
पकैत देह
घमायल/सोनितायल
हमर जीबैत देह
अहाँ तँ देखैत छी
मात्र हमर नामहीन घसल अस्तित्व
इह!
अहाँ की बुझबइ!!

हैदराबाद
०२/०१/२०१५

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