।। पाहुन ।।
भारत!
एक सुपरमार्केट
आधुनिक विश्व-बजार
आउ, करू व्यापार..
कोटि-कोटि लोक
ऋणक मोटगर गरदानी
पुष्पमाल जकाँ धारण कय
पंक्तिबद्ध ठाढ़ अछि
क'ल जोड़ने
चमकैत समान सँ ठूसल
सुसज्जित दोकानक समक्ष
अपन नंबर अएबाक
निरंतर प्रतीक्षा मे..
सुपरमार्केटक पछिला द्वार सँ
पैसि रहल अछि
गौरवर्ण व्यापारीक हेंज
दोकानदार के पँजियौबैत
हाथ मिलबइत
हँसैत/मुस्काइत..
कनिये फराक मे
मूक बधिर किछु लोक
मोन पाड़ैत
किछु बर्ख पहिलुक
लाल किला सँ देल
एक अचकनधारीक जयघोष
भौंचक्क भ' देखैत
बजारक आधुनिक खेल..
आइ फेर अएलाह अछि
मुकुटधारी व्यापारी पाहुन
वाशिंगटनक मालगाड़ी चलबैत
करबाक लेल
बजारक निरीक्षण
आ सुनबाक लेल
अपन गुप्त जयगान
लाल किलाक जयघोष मे..
नतमस्तक भ'
गीत गबैत जाउ
जयकार करइ जाउ
आबि गेल छथि आजुक
जन गण मन अधिनायक
पैसि गेल छथि
हमरा सबहक
सुसज्जित मोदीखाना मे...
हैदराबाद
२५/०१/२०१५
सन्दर्भ: बराक ओबामाक भारत आगमन
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