हे माँ शारदे!
लिय' एक बेर पुनि
आबि गेलहुँ लय
एक आर निवेदन..
सदति भेटैत रहल माँ
अहाँक स्नेहल आशीष
अहिना भेटैत रहय
ई त' सतत याचना
करिते रहब..
ओना
अइ बेरुका निवेदन
किछु आर अछि
कने ध्यान देबहि
हे माते!
देखिते हेबइ
कहियो जे रहय हमर देस
ज्ञानक महासुमद्र, से
केना सुखा सन गेल अछि
अज्ञानक अन्हार
तेना ने छैक पसरल
जे फुजलो आँखि लोक
केना अन्हरा सन गेल अछि..
हे वीणावादिनी!
निवेदन अछि माँ
कने विराम दियौ
वीणा वादन केँ
आ उठाउ ज्ञानकोष
फुकियौ कोनो महामंत्र
फेरू अपन वरदहस्त
हमर देस पर
जे चमकय फेर
ज्ञानक इजोत सँ
लेसय पुनि सद्ज्ञानक दीप
हमर देस
अहाँक जम्बू द्वीप..
हे वाग्देवी
स्वीकार हो प्रार्थना
जागइ फेर सँ सबहक
सुसुप्त भेल चेतना
फोंफ कटैत संवेदना..
यैह हमर निवेदन
यैह हमर याचना...
हैदराबाद
२४/०१/२०१५
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