किए कनैछी किए खीजैछी
अहिना होइछै
सानि नोर की थाल गीजैछी
अहिना होइछै
नीप लिय' चिनवार
जल घोंकल छै तैं की
चढ़ा दियौ परसाद
फल चूसल छै तैं की
फोड़ि माथ की सींथ भरैछी
अहिना होइछै
रक्त सँ की देबाल रंगइ छी
अहिना होइछै
छोड़ू न्याय विचार
क्यो लटकै छै तैं की
बंद करू केबाड़
क्यो भटकै छै तैं की
बेमतलब चूड़ी फूटैछै
अहिना होइछै
ठट्ठा मे टिकुली उजड़ै छै
अहिना होइछै..
कोलकाता
१९/०१/२०१५
No comments:
Post a Comment