Wednesday, January 28, 2015

सुबकैत खंडहर

तहिया
गाछ-बिरिछक युग मे
मनुक्खो
फलैत-फूलैत छल
साँस लइत छल
छाँह दइत छल..

आब
कोठा-मकानक युग मे
मनुक्खो
रंग ओढ़ैत अछि
रंग छोड़ैत अछि
दराड़ि उभरै छै
नींव डोलै छै..

आ फेर
मनुक्खो
बनि जाइत अछि
अपनहिं इतिहास सँ गछारल
अतीत दीस तकैत
सुबकैत खंडहर...

हैदराबाद
२८/०१/२०१५

No comments:

Post a Comment