तहिया
गाछ-बिरिछक युग मे
मनुक्खो
फलैत-फूलैत छल
साँस लइत छल
छाँह दइत छल..
आब
कोठा-मकानक युग मे
मनुक्खो
रंग ओढ़ैत अछि
रंग छोड़ैत अछि
दराड़ि उभरै छै
नींव डोलै छै..
आ फेर
मनुक्खो
बनि जाइत अछि
अपनहिं इतिहास सँ गछारल
अतीत दीस तकैत
सुबकैत खंडहर...
हैदराबाद
२८/०१/२०१५
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