किए करू
नरक निवारण लेल
उपास, आ की
कल जोड़ि
माथ निहुरा
प्रभु सँ
याचना / कामना
नरकवास सँ रक्षा हेतु..
कृपा तँ छन्हिए हुनकर
जे अही लोक मे
जिबिते मे
भेट गेल अछि पुष्ट सँ
तेहन ने अनुभूति
जे आब
केहनो नरकक
डर कहाँ?
संदेह कथीक?
कोलकाता
१९/०१/२०१५
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