Monday, January 5, 2015

सितलहरी

कनकनाइत
ठिठुरल देह
जेना पूसक सितलहरि मे
पड़ल होइ
बर्फक भफाइत सिल्ली पर
एकाकार होइत
पथरायल पानि संग

नहि नहि!
शवागार मे राखल
त्यागल लहास नहि
जिबिते छी हम
लगैत होइ निष्प्राण
धरि मृत घोषित नहि करु
बहि रहल अछि सोनित एखनहुँ
नस नस मे
सेरायल अछि
तँय की?
नोर एखनहुँ अछि
आँखि मे कतहु
जमल अछि
तँय की?

की करबइ
मनुषत्वक विकराल मुँह सँ
भ' रहल अछि
भारी हिमपात
भ' गेल छैक संसारक ह्रदय
बर्फक रंगहीन पहाड़
बहि रहल जतय सँ
साँय साँय
सर्द बसात
हिमखंड बनाबय पर आतुर
हमरहु!

मुदा भय नहि
उद्यान मे खेलाइत
धिया-पुताक किलकारी
निश्छल मुस्कान
करैत अछि विश्वस्त
एखन जीबैत रहब
अबोध शैशवक आभा
बिहुँसैत
पूसक नर्म रौद सन
मृदुस्पर्शी
स्वर्णिम चादर जकाँ
ओढ़ा रहल अछि
निरर्थक मृत्यु सँ
बचा रहल अछि..

थम्हत हिमपात
दिशा बदलत सर्द बसात
मरि जएत ठिठुरि क'
सितलहरी
नस नस मे
बहत गर्म रक्त
आँखि सँ
खसत सरस नोर
जीब हम
जीबैत रहब...

हैदराबाद
०५/०१/२०१५

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