कतेको नोर मुस्कायल
कतेको चोट बिहुँसैए
अहाँ के ठोर पर बैसल
कतेको दर्द चिहुँकैए..
बिलायल आँखि सँ सपना
ने बाजय हाथ मे कंगना
सुखायल गाल के सगरो
नहरि आँखिक भिजाबैए..
पियासल प्राण औनायल
ह्रदय केर स्पन्द अगुतायल
करेजक आगि देखू ने
हमर दुनिया जराबैए..
कोना चिनगी बनल धधरा
कोना प्रेमक बहल मदिरा
अहाँ के आँखि भीजैए
हमर जिनगी भसाबैए..
चलू ने लाँघि ई सीमा
चली ओइ पार मधुबन मे
जतय सँ गीत कोइली के
अहाँ के सोर पारैए..
कतेको नोर मुस्कायल
कतेको चोट बिहुँसैए
अहाँ के ठोर पर बैसल
कतेको दर्द चिहुँकैए...
कोलकाता
१८/०१/२०१५
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