Sunday, January 4, 2015

भोज

गे बुधनी
कते बहारबएँ
हाइं हाइं कर
कने धरफड़ो
अबेर होइ छै
गे बहिनिया..
ठकुरबाड़ी मे भोज छै
छोड़ ई सब
चल चल चल!
आइ हमहूँ सब
खायब ग'
आन मनुख सन..
बुढ़िया ठकुराइन
मुइलइए
जीबैत मे खूब खटेलकउ
घसलकउ-चुसलकउ
अन्न मंगलही त'
गरियेलकउ
धोअलकउ-कुटलकउ
आब मुदा बुढ़िया
मुइलउए
आइ खूब खुएतउ
भरि पेट
भरि मोन
चल चल चल
अबेर नइँ कर..
बड्ड दीब
तरकारी तीमन
खीर पूड़ी
रसगुल्ला पन्तुआ
आह आह!
बिसरि गेल स्वाद
आइ मोन पाड़ब
चल चल चल..
गे नइँ बूझै छही
अबेर करबें
त' साफ़ भ' जेतइ ऐंठार
लूटि लेतउ सब
मोन नइँ छउ ओइ बेर
केना लूटि-मारि भेल रहइ
हाथ लागल एकटा पत्तल
कोना झीकि लेने रहउ
खौंझायल कुकुरबा..
चल चल चल
अबेर नइँ कर
आब
सौंसे भ' गेलइए
मारिते रास
खौंझायल कुकुरक हेंज
टोले-टोल
भूकइत/हबकइत
कटाह कुकुर सब
चल चल चल
अबेर नइँ कर...
हैदराबाद
०४/०१/२०१५

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