नञि चिन्हलहुँ हमरा?
आह! कोना चीन्हब
कहाँ पड़ल हमरा
कोनो नाम
अस्तित्वक निर्माणक पहिनहिं
पहुँच गेलहुँ एतय
मुंसिपाल्टीक
कचराक डिब्बा मे
कोना चीन्हब!
नञि नञि!
आत्मग्लानि उचित नञि
वितृष्णा होइछ
से तँ उचिते
मनुक्ख नञि ने छी
हम तँ छी मात्र
वीभत्स माउंसक लोथरा
अशुद्ध / असिद्ध / अनिष्ट
जन्म सँ पहिनहिं
घोषित अवांछित
प्राण?
गेल हएत
हम किजानि गेलियइ
प्राण की होइत छैक
से बुझबाक समय
भेटितय तहन ने!
कथीक दुःख?
भरि जिनगी / प्रतिक्षण
भोगितहुँ नारी-पीड़ा
से एकहि बेर
जे भेल से भेल
नीके भेल
अहाँक संसार मे
कुहरब सँ पहिनहिं
बना देल गेलहुँ
मोचरल कोखिक उपजा
सहजहिं मुक्त!
हैदराबाद
२६/०१/२०१५
No comments:
Post a Comment