ओ अहाँक युग छल
स्वराजक स्वर्णिम युग
सौभाग्य छल अहाँक
जे अपन युगक नेतागणक चित्र
सजा सकलहुँ देबाल पर
पुष्पमाल चढ़ा..
ई हमर युग अछि
वस्तुतः असल कलियुग
हम नहि छी
अहाँ सन भागमान
सुनसान अछि हमर भीत..
कतहु कोनो कोन में
नोर चुअबैत
मौलाइत पुष्पहार
औखन क' रहल प्रतीक्षा
अपन सुपात्रक..
बुझबाक करू प्रयास
उन्नैस सय सैंतालिसक युग सँ
ए.के. सैंतालिसक युग धरि
बदलि गेल छैक
बहुत किछु
बिलटि गेल छैक
बहुत किछु...
हैदराबाद
२३/०१/२०१५
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