फेर
कलम पर चलल गोली
खसल बारूद
नील-कारी सियाही संग
मिज्झर भेल
गाढ़ सिनुरिया रंग
आ लेपा गेल भीत पर
चारू कात..
औनायल विश्व भेल
कने आर रक्तवर्ण..
नील अकास
नुका रहल अविराम
द्रुत बेग सँ
झाँपि रहल छैक सगरे
बिकट कारी मेघ
नीलाम्बर असहाय!
आदंकक आक्रमण सँ
थरथराइत..
गरजैत स्याह मेघ
जनि रहल अछि निर्बाध
मूसलधार सोनितक वृष्टि
माटि भ' रहल लाल
आँखि भ' रहल लाल...
चहुँदिस गाढ़ अन्हार
अन्हरायल बौक मनुख
आ, एहि भयावह अन्हार मे
कारी चश्मा पहिरने
मुकुटधारीक हेंज
करबद्ध हकमैत
थर-थर करैत
फुसफुसाइत
निष्ठाहीन खंडनक
अस्फुट निरर्थक शब्द...
सुनने छी मुदा
जखन खसैत छैक
कलम पर बारूद
तँ कलमो बनैत छैक अग्नेयास्त्र
फेकैत छैक आगि
उठबैत छैक बिरड़ो
उधियाइत छैक कारी मेघ
परिष्कृत होइछ अकास
पुनि होइछ इजोत..
फेर कलम पर
खसलैए बारूद
हउए देखियौ -
प्रत्याघात!
उठलइ झंझावात!!
हैदराबाद
०८/०१/२०१५
No comments:
Post a Comment