साहित्य पथ पर अनवरत यात्रा.....
भावुक मोन कने डोलल आखर झहरल
आखर-आखर बीछि बीछि किछु शब्द बनल
शब्दक मोती गांथि-गांथि किछु पाँति सजल
पाँति-पाँति सुचि-स्नान करा निर्मल अउँटल
अउँटल पाँति ह्रदय बाटे गढ़गर टघरल
गढ़गर भावक रस बरसल कविता जनमल
कोलकाता २०/०१/२०१५
No comments:
Post a Comment