एंह!
कहैत छी फुसिये
जे नहि छैक गाछ
शहर मे
पर्यावरण पर संकट..
प्राकृतिक विपदाक सूचक..
सबटा फुसिये!
हइए सुनू..
हमर भीजल मोन मे
एकटा विशाल गाछ
झमरल डाड़ि-पात
फल-फूल सँ छाड़ल
हमर मोनक गाछ
अही गाछ सँ भेटैत छैक
हमर मोन के
ऑक्सीजन
तँय लैत अछि श्वास
हमर मोन
शुद्ध बसात मे
आ जीबैत रहैत अछि
प्रति क्षण
मोनक गाछ पर
असंख्य चिड़ै-चुनमुन
अपन-अपन खोंता मे
गीत गबैत
आ, ओकर सबहक संग
सुर लगबैत अछि हमर मोन
झूमैत आनंद मे
फेर उड़ितो अछि स्वछन्द
ओकरे सबहक संग
चंचल घुम्मकड़ मोन
उड़ैत उड़ैत
गाछ सँ दूर
प्रदूषित होइत अछि
आक्रान्त/विभ्रांत
बेदम होइत अछि
आ थाकल ठेहीआयल
घूरि अबैत अछि
बैसि जाइत अछि
अपनहिं गाछक तर
शीतल छाहरि मे
सुस्ताइत अछि
फेर होइत अछि सुभ्यस्त
फेर ऑक्सीजन
शुद्ध बसात
चिड़ै-चुनमुन
फेर गीत-संगीत
फेर उन्मुक्त उड़ान
शहर मे
हम छी
हमरे मे हमर मोन
मोन मे गाछ
गाछक संसार
हे लिय'
भ' गेल ने
शहर मे गाछ!
कतेक हरियर गाछ..
कतेक हरियर शहर..
बाह रे बाह!!
हैदराबाद
०६/०१/२०१५
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